PM Fasal Bima Yojana 2026 Process: राजस्थान में खेती-बाड़ी पूरी तरह मौसम के मिज़ाज पर निर्भर करती है। कभी सूखा, तो कभी भारी बारिश, ओलावृष्टि और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाएं किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फेर देती हैं। ऐसे में किसानों को आर्थिक तंगी से बचाने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) एक सुरक्षा कवच का काम करती है।
खरीफ 2026 के लिए राजस्थान सरकार के कृषि विभाग ने फसल बीमा को लेकर नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। अगर आप भी राजस्थान के किसान हैं और अपनी फसलों को प्राकृतिक नुकसान से बचाना चाहते हैं, तो यह खबर आपके काम की है। आइए जानते हैं कि कौन सी फसलों का बीमा होगा, कितना प्रीमियम लगेगा और नुकसान होने पर क्लेम (Claim) कैसे किया जाता है।

PM Fasal Bima Yojana 2026 Process प्रीमियम?
फसल बीमा कराने के लिए किसानों को बहुत ही मामूली प्रीमियम राशि देनी होती है, बाकी का बड़ा हिस्सा सरकार और बीमा कंपनियां मिलकर वहन करती हैं।
| फसल का प्रकार | किसान के लिए तय प्रीमियम दर |
| खरीफ फसलें | कुल बीमित राशि का 2% |
| रबी फसलें | कुल बीमित राशि का 1.5% |
| उद्यानिकी एवं वाणिज्यिक फसलें | कुल बीमित राशि का 5% |
राजस्थान में कौन-कौन सी खरीफ फसलें बीमा के दायरे में हैं?
राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, इस बार खरीफ की लगभग सभी मुख्य फसलों को बीमा सुरक्षा के तहत शामिल किया गया है:
अनाज व दलहन: बाजरा, ज्वार, मक्का, धान, मूंग, मोठ, ग्वार, चंवला, उड़द, अरहर।
तिलहन व अन्य: मूंगफली, सोयाबीन, तिल और कपास (Cotton)।
(ध्यान रहे: आपके खेत का क्षेत्र और फसल उस जिले के लिए अधिसूचित (Notified) होनी चाहिए।)
किन-किन परिस्थितियों में मिलेगा बीमा का लाभ?
योजना के तहत फसल की बुवाई से लेकर कटाई के बाद तक के नुकसान की भरपाई की जाती है:
- बुवाई न हो पाना (Prevented Sowing): कम बारिश या प्रतिकूल मौसम के कारण अगर किसान खेत में बुवाई नहीं कर पाता है, तो भी बीमा कवर मिलता है।
- फसल के दौरान नुकसान: सूखा, बाढ़, जलभराव, ओलावृष्टि, बिजली गिरना या व्यापक स्तर पर कीट/बीमारी फैलने पर।
- कटाई के बाद का नुकसान (Post-Harvest Loss): फसल काटने के बाद सुखाने के लिए खेत में रखी हो और अगले 14 दिनों के भीतर बेमौसम बारिश या तूफान से खराब हो जाए, तो भी क्षतिपूर्ति का प्रावधान है।
PM Fasal Bima Yojana 2026 Claim Process
अक्सर किसान सही समय पर सूचना न देने के कारण बीमा क्लेम से वंचित रह जाते हैं। यदि प्राकृतिक आपदा से आपकी फसल को नुकसान होता है, तो इन बातों का विशेष ध्यान रखें:
- 72 घंटे के भीतर सूचना दें: फसल खराब होने के 72 घंटे के अंदर इसकी जानकारी अपने नजदीकी कृषि अधिकारी, बैंक, CSC सेंटर या बीमा कंपनी के टोल-फ्री नंबर पर ज़रूर दें।
- दस्तावेज़ संभालकर रखें: अपना बीमा आवेदन पत्र, प्रीमियम रसीद, गिरदावरी (फसल का प्रमाण) और बैंक पासबुक सुरक्षित रखें।
- निरीक्षण (Survey): कृषि विभाग और बीमा कंपनी की टीम खेत में आकर नुकसान का जायज़ा लेगी, जिसके आधार पर क्लेम की राशि आपके सीधे बैंक खाते (DBT) में भेजी जाएगी।
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गैर-ऋणी (Non-Loanee) किसान बीमा कैसे करवाएं?
जिन किसानों ने बैंक से फसली ऋण (KCC) नहीं लिया है, वे भी आसानी से अपनी फसल का बीमा करा सकते हैं:
अपने नजदीकी CSC केंद्र (ई-मित्र), बैंक शाखा या बीमा कंपनी के एजेंट से संपर्क करें।
आप चाहें तो खुद भी नेशनल क्रॉप इंश्योरेंस पोर्टल (pmfby.gov.in) पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
ज़रूरी दस्तावेज़: आधार कार्ड, जमाबंदी (जमीन की नकल), बोई गई फसल का घोषणा पत्र और बैंक पासबुक।
जरूरी सलाह: केसीसी (KCC) धारक ऋणी किसानों का बीमा बैंक द्वारा स्वतः ही कर दिया जाता है। यदि कोई ऋणी किसान बीमा नहीं कराना चाहता, तो उसे अंतिम तिथि से पहले अपनी बैंक शाखा में लिखित में आवेदन देना होगा।
निष्कर्ष
PM Fasal Bima Yojana 2026 Process से जुड़ी किसी भी जानकारी के लिए केवल आधिकारिक पोर्टल (pmfby.gov.in) या अपने जिले के कृषि विभाग पर ही भरोसा करें। खरीफ 2026 के लिए अपने जिले की अंतिम तिथि और अधिसूचित फसलों की जांच समय रहते ज़रूर कर लें, ताकि नुकसान के समय आपको आर्थिक सहारा मिल सके।